अनुष आसन
कौए के चहकने से पहले भोर के अंधेरे में उमंगी आंखे सूर्योदय के पहले किरणों में भविष्य का तापमान नापती है। दुनिया का सामना करे बेझिझक और निडर ऐसी स्पष्ट निर्धारण सालों के धैर्य से भरी है। सफलता पर तालियों के गूंज के पीछे छुपे आलोचना करने वालो को खबर नहीं सामने से सपनो को टूटता देख एक एक ईट जोड़कर उसे वापस खड़ा करने की हिम्मत ।
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