असमंजस
दिमाग काम नहीं करता, दिल का काम समझ नहीं आता। मन शांत नहीं होता, सुकून कब मिलेगा, क्या पता? आसमान से पूछा, वो खामोश था, हवा से पूछा, कोई जवाब नहीं। दरिया की लहरें भी उलझी मिलीं, जैसे उन्हें भी करार नहीं। चाँद भी अधूरा सा दिखा, रातें भी कुछ कहती नहीं। दिल को सुकून कब मिलेगा, ये पहेली सुलझती नहीं।
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