मैं
मैं बिल्कुल अपने नाम सा हूं, जाना पहचाना गुमनाम सा हूं। कभी शरबत का मीठा प्याला था, अब ज़हर के कड़वे जाम सा हूं। हार कर भी अजेय होने का गुमान था, मैं भ्रम का सबसे बड़ा एक पैग़ाम सा हूं। जिस शहर की रौनक रौनक था, उसी शहर में बड़ा बदनाम सा हूं। #ajaynswami
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