कल्पना
मैं रहता हूं, तस्वीरों की झलक से बनी एक ग़ैर-हक़ीक़ी जहान में। आती-जाती तस्वीरें, उम्मीद से भरी, हसीन फ़िज़ाओं की खुशबू और छुअन का एहसास लिए। मैं सोचता हूं — बस यहीं रहूं, इस उम्मीद में, इस एहसास में।
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