तेरा आना।
मैं था एक अल्हड़, अनजाना बेरोजगार सा फ़कीर, तेरा यूं जिंदगी में आना, लेकर आया किस्मत की नई लकीर। मैं पानी आ उथला, टूटा सा एक तारा, मैं भटकता सा नाविक, तू ही मेरा किनारा। मैं था ऐसे जैसे कभी न भरने वाला घाव, तपती धूप जैसे जीवन में, तू लाई ठंडी छांव। हर पल छाया रहें मुझ पर तेरा ही शुरूर, तू जख्मों पर मरहम मेरे गमों का तोड़ा तूने गुरूर। मुसीबतों के बादल कैसा था वो काला अंधेरा। तू बनकर आई जिंदगी में उम्मीदों भरा एक नया सवेरा। मैं थका हारा, बेसहारा ढलता हुआ या टूटा सा तारा, फिर से चमक उठा जब मिला तेरा सहारा। नीरस जीवन, सुन्ना सा था ये जहान, नई उड़ान भरने को तू मिली जैसे खुला आसमान।
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