😔भीड़ का डर 😔
मस्ती से अपने सफर में जा रहा था मैं खोया हुआ था मैं खुद में मदहोश होकर कुछ इस तरह वो सामने आ खड़ा हुआ मुझे दिखाई नहीं पड़ा वो किस तरह, वो गिर पड़ा नीचे टकरा गए हम इस तरह, डर से मैं भाग खड़ा हुआ कुछ इस तरह, मैंने देखा नहीं उसे जिसे भीड़ ने लिया मैं बचना चाह रहा था मगर भीड़ ने पकड़ लिया डर इतना था दिल में के साँस रुक गई , मैं निकल रहा था बचकर मगर भीड़ अड़ गई। कुछ समझ पाता मैं के लोगों ने घेर लिया फिर मैंने भी दिल पर हाथ धर लिया उनके डर ने मेरे अंदर घर कर लिया और मैंने खुद को उनके हवाले कर दिया मेरे मासूम चेहरे को देख कर भीड़ ने भी मुझ पर थोड़ा रहम कर लिया छोड़ दिया मुझे अपने हाल पर .. मैं चल दिया सफर पर अपने और सफर पूरा कर लिया पर उस भीड़ के डर ने मेरे दिल में अपना घर कर लिया ।। ✍️Kuldeep✍️
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