बादल जितना आसमान
मैं हद से ऊँची उड़ान ना भर सका मुझे बादल जितना आसमान मिला। मेरे बड़ो ने मुझे फूलों की तरह पाला भले मुझे छोटा सा बागवान मिला। सपनें मेरे भी फलक लाँघते थे पर हाथ रखने उतना रोशनदान मिला। जो साथ चले वो रास्तें में ही रुक गए, भीड़ में रहते हुए भी कारवाँ सुनसान मिला। आधी तनख्वाह में दुगुनी मेहनत करी, तब जाकर तो मुझे कँही काम मिला। रईसों की महफ़िल में नज्में गाता रहा, बदले में शायर को ग़ुरबत का ईनाम मिला। अतीत के साये भविष्य को डराते रहे कहीँ कोने में पड़ा मेरा वर्तमान मिला। मैं हद से ऊँची..... -महेन बारोठ
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