भूल क्यों जाते हैं प्रभु
हे प्रभु ! पता नहीं आपकी ये आदत बुरी है या आपकी कोई मज़बुरी है कभी एसी खोलकर कभी ब्लोअर खोलकर कभी पानी की टोंटी खोलकर भूल जाते हैं ,कान में तेल डालकर। कभी कभी तो आप ठीक कार्य करते हैं, इसके विपरीत नल की टोंटी हीं नहीं खोलते हैं नीचे आपके लोग विपत्ति झेलतें है आप भी खाइए बादाम व अखरोट दूध में डालकर हल्दी और सोंठ। नरेंद्र सिंह 18.01.2024
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
