मैं तो पानी हूँ
मुझे नहीं पता खुशियां कहाँ बिखर गईं कहाँ गए हौसले कहाँ दफ़्न हैं कोशिशें और कौन उठा ले गया तरकीबें। लेकिन मैं तो पानी हूँ ढूंढ लूंगा राहें उन तंग गलियों में और रात के अंधेरों में, पत्थर टकराएंगे, रोकेंगे पर मैं तो बहता जाऊंगा। मैं तो पानी हूँ उम्मीद दिखेगी तो उसपर भी फिर जाऊंगा लेकिन बहता जाऊंगा क्योंकि मेरा काम है बहना और मैं बहता जाऊंगा।
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