आशिक़ की रिहाई
अब इस आशिक़ को कोई इश्क़ की ज़ंजीर से रिहा तो करवाओ, मर्ज़ अब आशिक़ी का फैल चुका है—कोई इसका इलाज करवाओ। उसके घर पे चहल-पहल दिख रही है, उसकी शादी तो नहीं? पता तो करवाओ। चेहरे पे उसकी बड़ी मुस्कान झलक रही है, रक़ीब को आबाद किया है क्या—मालूम तो करवाओ।
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