अमर प्यार
एक मस्त मग्न तितली भिड़ गई गंभीर शेर से। अपने खिलखिलाते हसी लिए घुस चली उसके अंधकार गुफा में रोशनी के गुब्बारे फैलने। वो घबराकर अहंकार में गुर्राया पर तितली अपना जादू का चूरा हर कोने में फैलती गई। हिचकिचाते हुए शेर ने भी एक निवाला आजमाया और देखते ही देखते मुस्कुराते हुए तितली के आदर्शलोक में पूरी तरह समा गया।
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