गनीमत
गनीमी ======================== ये दुनीया है जो मिठा बोलेकर, कलेजपे छुरी चलाये, और घाव की तडफ देखने के लिये, दिवारो को कान लगाये. जरा सचो ऊन की फीतरत , ईन्सांन मे छुपे सैतान की होती है. क्या कहना ऐसै लोगो के बारे मे, आपने घर गृहस्थी के बदले, ईनका ध्यान और मण, कही और भटकता है. गनीमत है भगवान तुने मुझे, जीना सीखाया...., और खासकर ऐसै लोगो का, हर्ष ...... क्या होता , ये पहलेही बाता दीया. वरणा आदत का मारा मै तो, फस गया होता, फस गया होता. ================ ==================
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