इंकार
कुछ तो वज़ा रही होगी तेरे इंकार की, जो तुझसे टाला नही गया । या शायद वो तेरा गुरूर था जो तुझसे संभाला नहीं गया । तेरी हर याद हर निशानी मिटा दी मैने, पर मेरे रूह की दीवार पे टंगा तेरा तस्वीर मुझसे निकाला नहीं गया ।।
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