प्रसन्नता
संसार की प्रसन्नता के सार एक मात्र शिव है। शिव की प्रखर प्रसन्नता के सार श्री कृष्ण है।। माया के स्वामी विष्णु संसार के पालनकर्ता विष्णु। विष्णु जी की हर एक स्वास में महादेव है। पहले माया पति विष्णु दूसरे सन्यास के स्वामी महादेव है।। पहले पालनकर्ता हरी दूसरे विनाशक शिव है। शिव के हृदय में विष्णु विष्णु के हृदय में शिव है।। एक शांताकार है तो दूसरे त्रिनेत्र धारी है। कमलनयन वाले माधव माधव के हृदय में बसने वाले कपालधारी शिव है।। संसार की प्रसन्नता के सार एक मात्र शिव है। शिव की प्रखर प्रसन्नता के सार श्री कृष्ण है।। रचनाकर युवा नगर अध्यक्ष कानपुर नगर ब्राह्मण समाज जन सेवा समिति (पं॰ युगांक अवस्थी)🙏
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