। वार्षिक अंतिम शब्द ।
देखो देखो ऐसी बात है इस साल की ये अंतिम रात है अनोखी मेरी ये कहानी है सब लोग सुन लो इस बार मेरी ही जुबानी है अनोखी बीती ये साल बहुत किए बुरे कार्य बहुत किया पिता के नाम का गलत ईस्तेमाल अब द्वारा बो गलती नही होगी की हुई गलती अब सही होगी अब लाऊंगा में अपने में सात्विक सुधार शर्त ये है, तुम्हे नही कहना होगा मुझे बेकार मैं इस बार करके दिकाऊंगा जो कहते थे कि बेटा तुमसे ना हो पाएगा । अनदेखा करदूंगा उनको तुम अब अपने हारने की तैयारी करो और खिशकलो वन को हारा तो कई बार लेकिन में नही घबराया गिरा तो कई बार लेकिन अभी तक था पापा ने उठाया समझ आया नही था , कभी ध्यान ही नही दिया अब तो करके दिखाऊंगा , इस बार तो मोका मिल गया अब लक्ष्य नही बदले जाएंगे । चाहे लाख कहें जलने वाले ।। मेहनत तो अब और ज्यादा होगी । किंतु अब रास्ता और तरीके बदले जाएंगे ।। कोशिश ही तो रंग लाती है तभी तो फलपूर्वक मेहनत -- मेहनत कहलाती है।।
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