समझोता
समझोता ============================ समझोता ईसलिये कुछ आपनेही, फस गये जीवन की राह मै, उन्हे समझाने के लिये, आवाज मेरी ऊन तक जाने के लिये, उन्हे कुछ समझाने के लिये, रुका हु मै कुछ देर समझोता कर, जीवन की डगरपे चलते चलते. कुछ देर के लिये , आपनोकोही कुछ समझाने, रुका हु मै मण से कुछ समझोता किये हुये. आपनेही तो होते है वो......, जो समझते है बहोत देर से, वरणा इतनी देर मे तो समझ जाते, जो कोयी गैर होते. अभी ओर कुछ देर बाकी है, शायद समझ जाये जो मेरे दिलकी बातें, ईसलिये समझोता कीये , खडा हु मै कुछ समझाने, समझोतेकी बाते जो मैनै, अनुभव से सीखी है..........!. कुछ खटटी, कुछ मिठी है, बहुत सारी यादे, जो समझ से बाहेर है, वही समझाने खडा हु पकडकर थोडी सासे, वही समझाने खडा हु पकडकर थोडी सासे. =============================
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