इंतजार
इन खुशियों के शहरों को भला दर्द की गलियाँ कहाँ होगी पता मिलती है जिन्हें बिन मांगे खुशियां उनको होती कहाँ कमी महसूस भला पास होकर भी दूर तू क्यूँ रहा जाने कैसा यह इंतजार है भला .... दर्द मैं जीते जी दर्द लगे क्यूँ अच्छा दर्द लगे जैसे मानो कोई हो अपना खुद से ही खुद में यह उलझन क्यूँ भला यूँ खुद की समझ भी मुझे कहाँ भला फिर भी दिल कहाँ यह मानेगा जाने कैसा यह इंतजार है भला ...
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