मन हरि से लगना पड़ेगा
कहाँ विष का भी कोई असर था? कौन कहता है उसमे जहर था? भक्ति मीरा सी करनी पड़ेगी, उठ के गिरधर को आना पड़ेगा। छोड़ चिंता झमेला जगत का, मन हरि से लगाना पड़ेगा। @मनोज कान्हे 'शिवांश'
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