गाना
पिछले वर्ष 6फरवरी 2024 को काफ़ी ठंड थी तो उस समय की रचना ) (आज सबेरे स्नान करने गया तो वस्त्र पृथक करने के पहले अचानक एक गाने की इन पंक्तियों की रचना हो गई।) इतनी शक्ति मुझे देना भगवन कि मैं नहा सकूँ; मैं नहा सकूँ,मैं नहा सकूँ, तेरा गुण मैं गा सकूँ। ठंड बढ़ गई है इतनी कि मैं हिम्मत हार रहा हूँ; जल देखकर ही प्रभु,मैं थर-थर कांप रहा हूँ। बिन नहाए ही भगवन,पूजा कैसे करूँ मैं तेरी; बिन पावन हुए,कैसे,पूजाजगह में जाऊं तेरी। भक्त बाथरूम में डरा है,प्रभु तू हिम्मत देना; कृपा मुझ पर कर प्रभु, भय सभी हर लेना। अगर न साहस दिया तो,स्नान न कर पाऊँगा; बिना तेरी पूजा को,दिनभर भूखे रह जाऊंगा। इतनी शक्ति मुझे देना भगवन कि मैं नहा सकूँ; मैं नहा सकूँ,मैं नहा सकूँ,तेरा गुण मैं गा सकूँ। नरेन्द्र सिंह 06.02.2024
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