अश्क ....
ना आंसू निकले, ना हो अल्फ़ाज़, दिल तो रहा, क्या सुनोगे उसकी आवाज? अपनों के दरमियां भी अकेली हूं मैं, मत पुकारो " अपनी" कहकर बार -बार ....
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