वीर दुर्गादास राठौड़
मारवाड़ की धरा पर जिसके, घोड़े के टापों के निशां थें। वो स्वाभिमानी राष्ट्रभक्त, वीर दुर्गादास राठौड़ थें। जुनागढ़ के जीर्ण दुर्गों में, यवनों के बच्चे पाले थें। उनको कुरान सिखाने वाले, वो धर्म भक्त दुर्गाबाबा थें। स्वामिभक्ति के हित जिसने, जीवणी पूरी काटी थी। मुगलों के विरुद्ध उनके, रग में मारवाड़ की माटी थी। ओरंग के लालच ने उनको, कर्तव्य पथ से ना डिगाया था। भारत विजय की रणनीति पर, दुर्गा ने अंकुश लगाया था। अश्रुपूरित आंखों से उसने, अन्तिम बार देखा इस माटी को। हे !भगवन अर्ज है तूझसे, महफूज़ रखना मरु थाती को।
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