अंजाम
देखे थे , सपने वो ना -बाद पड़े है , हासिल ना हुआ कुछ भी , हम खाक पड़े है , जालिम दुनिया कहर गुजार गई , हम जलती दुनिया में बनकर राख पड़े है
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
देखे थे , सपने वो ना -बाद पड़े है , हासिल ना हुआ कुछ भी , हम खाक पड़े है , जालिम दुनिया कहर गुजार गई , हम जलती दुनिया में बनकर राख पड़े है
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets