पहली गुज़ारिश
मेरे लिए ये दिन सबसे खास सबसे प्यारा, मेरे अंधियारे जीवन में बनकर आई है उजियारा। खुदा से की गई तू पहली गुज़ारिश है, तपते रेगिस्तान में पड़ती सुहावनी बारिश है। नदी सी बहती खुशियों का तू बहाव है, ठिठुरती ठंड में तू मिठी सी अलाव है। कभी शरारती , कभी मासूम , तेरे अपने रूप है, सफ़ेद धुंध को चीरती , तू सुनहरी धूप है। तू जैसे खुदा का भेजा कोई फरमान है, मैं उड़ता पंछी , तू ही मेरा खुला आसमान है। तू ख़ुदा से मांगा एक अरमान है, हर दर्द को मिटाने वाली तेरी मुस्कान है। पहाड़ों पर गिरी जैसे सफेद बर्फ है। तेरी मीठी तुतलाती बोली हर हृदयों को करती स्पर्श है, मैं अडिग वृक्ष सा खड़ा पर तू ही मेरा मूल है, मेरे घर को खुशबू से महकाता, तू पहला फूल है। दुआ है तेरे सपनों को सुनहरे पंख मिले, जिस राह चले खुशियों के फूल खिले। तू ऐसे ही हंसती रहे , मुस्काती रहे , सालों साल, हर कदम पर मैं खड़ा हूं, बनकर तेरी ढाल।
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