सवाल ऐ इश्क
समायोजित करते करते इतने सुकुड़ गए कि हम में हम थोड़े कम से रह गए। हर चीज में हामी भरते भरते जब ना कहना सीखा तो लोगों से हजम ना हुआ। जिन्होंने वादा किया था पूरी जिंदगी साथ देने का उन्हीं हाथों ने इतनी जल्दी अपनेपन का नाता तोड़ा कि हम देखते ही रह गए और हमसे हमारी जमीन और आसमान पल में ही छिन गया।
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