शीर्षक :गोरैया और दूध-भात
बहुत दिनों बाद देखा गोरैया को चहकते आँगन में चुग रही थी दाना अपनी चोंच से। कारण समझ गया इसके आँगन में आने का चूँकि शहर से नन्हें बच्चे गाँव आये हैं और सुबह-सुबह दूध-भात खाए और बिखेर दिए यत्र-तत्र अन्न के दाने। अन्तर्यामिनी होती है गोरैया आ गई चुगने दाना जश्न मनाने गृहस्थ को आशीष देने। दूध-भात खाने को अब बच्चों को कम ही दिया जाता है तो गोरैया भी मुँह मोड़ ली इंसानों के आँगन से। लोग वंचित हो गए उसकी दुआ से इसलिए लोग रहने लगे गमगीन अकेले-अकेले जीने लगे मनहूस की तरह सिमट गए अपने में खाते-पीते लाश बनकर। नरेन्द्र सिंह 25.06.2025
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