:श्रद्धेय जयशंकर प्र
कालजयी जिनकी रचनाएं,व कलम अमर धन्य है, युगपुरुष महान विद्वान जो,जिनकी कृति अनन्य है। शुभ बेला अठारह सौ नवासी तीस जनवरी में, ये अवतरित हुए थे काशी शिवजी की नगरी में। श्रद्धेय जयशंकर प्रसाद छायावाद के प्रवर्तक थे; ये महान ओजस्वी कवि और युग के प्रवर्तक थे। लेखक,कहानीकार,उपन्यासकार,नाटककार थे; ये कथा और निबंध के अद्वितीय शिल्पकार थे। आध्यात्म,प्रेम और सौंदर्य के प्रेमी और प्रेरक थे; ये राष्ट्रप्रेम व उदार मानवतावाद के उत्प्रेरक थे। अपने कृतित्व से ये साहित्य को अलंकृत किए; साहित्यिक विधाओं से जगत को झंकृत किए। हिंदी की अखंडज्योति ये,जिनकी रश्मि प्रचंड है; हिंदी काव्यलोक के अप्रतिम तेजोमय मार्तंड हैं। नरेंद्र
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
