वकीफ
वाकीफ ==================== हरकते तुम्हारी हर वक्त, सिर्फ कुछ पाने की लालसा...., काॅलेटी तुम्हरी बताती है, तुम्हरी हैसीयत क्या है. अंदाज तुम्हारा कुछ, ऊलजुलुलसा......, कुछ भी करले तु, अभी ईनसांन बणना तो.... , बहोत दुर की बात है. ये तमस विचारक वाकीफ हु मै तुझसे, तेरी औकात है..... सिर्फ बाहीरख्याली और बेवडे की . जो सिर्फ हैवान की तरह, पीना और खाना जानता है, अभी ईनसांन बणना, तरे बस की बात नही है। आनेवाले तेरे ......., दस पुसत्तो के नसीब मे वो नही है, वाकीफ हु मै तुझसे अच्छी तरह.... , वाकीफ हु मै तुझेसे इच्छी तरह. ======================== .
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