बेइंतहा इश्क
चलो कही जाते है एक नया घर बनाते हैं तुम सुबह गिले बालों से मुझे उठाना और मेरा तुझे बाहों में भरकर फिर थोड़ा और सोने का बहाना बनाना तुम मंदिर में भी मेरे सर को अपनी चुन्नी से ढक देना बिना कहे भगवान से हमारी जिंदगी भर का साथ माग देना फिर मेरा रसोई में जाने का बहाना ढूंढना एक ही परात में दोनों का आटा गूथना अंगुलिया टकराना तुम्हारा शर्माना और इस बेख्याली में रोटी का जल जाना और मेरा उसे खाकर वाह कहना और तुम्हारा हाथ चूम लेना श्याम की हमारी चाय तुम्हारा पूछना की चीनी कितनी तुम एक घूट ले लो बस उतनी और तुम्हारा एक घूट लेना कप मुझे देना और मैं पागल उस कप में तुम्हारे लिपस्टिक के निशान ढूंढूंगा और फिर हर घूट में चाय में मिला इश्क पिऊंगा
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