बारिश
रिमझीम रिमझीम घुंघरू बजाती हाय ये बारिश कितना लुभाती छनक छनक कर बूंदे गिरती तन पर गिरतीं,दिल को भीजाती धीमी धीमी मद्धम मद्धम हौले हौले हंस के गाती उड़ती हवा संग रुख पे बूंदे झनन झनन रुख को ये सजाती भीगा है मन यहां,भीगी हैं यादें सब भींगी है ये ज़मीं, भीगी हैं बाते सब भींगी सी घास पे, शबनमो की चांदनी भीगी हवा पे यूं सज रही है ये ज़मीं भीगी भीगी आब से लब्ज़ सजाती हाय ये बारिश कितना लुभाती राजीव
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