भाईचारा
छोटी छोटी बातों पर रूठकर अचानक से मुस्कुरा देना। पानी कितना भी गहरा हो साथ मिलकर उससे निकलने का जुगाड निकालना। जाना चाहे किनारे के दुकान पर या लॉन्ग ड्राइव पर, भाई के बिना तो चांस ही नहीं। खुशी का जश्न हो या दुख की घड़ी छाई हो सबसे पहले उसी को खबर देना। और उसका पलटकर एक ही जवाब चल पार्टी करते है। क्योंकि भाई एक रिश्ता नहीं एक इमोशन है जिसके साथ रहने से सब ठीक हो जाता।
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