जो सामने तू आएगा
किस की कमी मिट जाएगी जो सामने तू आएगा क्या ज़िंदगी खिल जाएगी जो सामने तू आएगा मेरा जहां एक भरम है ऐसा यकीं क्यूं हो गया शाख़-ए-यकीं जल जाएगी जो सामने तू आएगा किस राह से तू आएगा और साथ में क्या लाएगा इस की ख़बर मिल जाएगी जो सामने तू आएगा बस दूर ही से देखना पड़ता है तुझ को हर जगह फिर सोहबतें खिल जाएगी जो सामने तू आएगा किस भेस में तू आयेगा किस रूप में तू छाएगा ये कश्मकश मिट जाएगी जो सामने तू आएगा बादल भी तेरे नक़्श है साए भी तेरे हम-सफ़र शाम-ए-क़हर जल जाएगी जो सामने तू आएगा क्या बताऊं हाल-ए-दिल कि चैन सारा लूट गया नफ़्स-ए-सुकूं मिल जाएगी जो सामने तू आएगा 🍂
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
