स्वाहा
अपने अरमानों का गला मैंने खुद ही आज दबाया है जीवन की एक विशेष उपलब्धि को आज ठुकराया है कुछ अनुभव कुछ स्मृतियां शायद मेरे नसीब में नहीं इसी लिए आज मैंने अपना हृदय खुद से ही दुखाया है । शांति नहीं जिस राह पर उस पर चलना बेमानी है दिन प्रतिदिन के उलाहनों से खुद को आज बचाया है जो हृदय में है उसकी तड़प तो आजीवन बनी रहेगी खुद को ज़ख्मी कर के मैंने आज उन्हें समझाया है। ऐसे भी कहीं घूमने का न अवसर है ना सामर्थ्य अब एक स्वप्न के पूर्णत्व का प्रयास भी आज ठुकराया है जीवन में जो बचा है उसे ही समेट लूँ तो अच्छा होगा बंधनों के जकरन का अह्सास खुद आज कराया है । जीवन एक कैदखाना आजीवन कारावास भोगना है अब सजा मिली है तो मुक्ति के अरमान को दबाना है एक गलती कर दी थी आज उसका प्रायश्चित किया अब कभी ऐसे दुर्लभ विचारों को मन में नहीं लाना है ।
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