...जादूगर...
वक़्त जादूगर है.. मैंने उसकी जादूगरी को देखा है। वो बच्चे जिन्हें माँ बाप ने कल लोरी सुनायी थी, उन्हीं बच्चों को आज उनपर गरजते देखा है। थे जो कल किसी के हमसफ़र, आज उन्हीं को किसी और के साथ सफ़र करते देखा है। खुशीयों और ग़मों को भी अपने ठिकानों की अदला-बदली करते देखा है, हाँ! मैंने जिंदगी को अपना पता बदलते देखा है। अपनों को पराया और परायों को अपना कर जाने वाले, वक़्त के इस हसीं सितम को देखा है चेहरे पर मुखौटा लगाए लोगों को, ग़मों की हँसी हँसते हुए देखा है। फुटपाथ को घर और घर को मकान बनते देखा है, ये मैंने जिंदगी को थोड़े करीब से जीकर देखा है। लम्हों में सदियाँ और सदियों को लम्हों में बदलते देखा है। मैंने वक़्त की इस चाल को भी देखा है। तजुर्बो का उम्र से कोई लेना देना नहीं, ठोकरों में तजुर्बो का मिलना देखा है। मैंने वक़्त को बदलते देखा है। वक़्त जादूगर है.. मैंने उसकी जादूगरी को देखा है।
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
