वतन
वतन =============== वतन तुम्हारा है भारत देश, एकता से भरपुर, ऊस कुछ देना सीखो, मांगते हो क्यु.................., भिकारी की तरह. कमी आरक्षण, तो कभी, रेशन, देखो जरा, बळीराजा की तरफ, वो मा़ंगता कम है देता जादा. सीखो ऊनसे कुछ, कुछ तो......., याद करो जरा, सुभाषचंद्र बोस को. राजगुरु और आझादसींग को, राष्ट्रपिता, महात्मा को, जीन्होने दीयाही आजतक भारत देश को. शीखो कुछ ऊन से, अच्छा है देना वतन को, भिकारी बणनेसे पहले जरा, जरा दाता तो बन के देख लो...., जरा दाता तो पण के देख लो. ===================
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
