आज
गीता में कहा है कर्म करते रहो प्रयास करते रहो अपना पूरा ध्यान कर्म पर रखो बदले में जो भी मिले सहर्ष स्वीकार करो। अनुकूलता प्रतिकूलता तो परिणाम की प्रकृति है शुद्ध सात्विक ईमानदार प्रयास ही भगवत भक्ति है आज में रहो ,आज के लिए रहो, आज के लिए करो आज ही तो तुम्हारे हाथ में है, कल की क्यों फ़िक्र करो। आज ही अस्तित्व है आज ही प्रयास है आज पर ही केवल नियन्त्रण है आज के लिए ही संपूर्ण अर्पण है।
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
