फिर से उठो
💐जीवन में कुछ पल आता है, जो कभी भी रुला जाता है। जो रोना, धोना छोड़ दिया, वही नर फिर सँवर जाता है।। कहीं तूफान जब आता है, पक्षी -नीड़ उजड़ जाता है। किन्तु खग मानता हार कहाँ फिर नव बसेरा बनाता है।।💐 नरेन्द्र मेरा आने वाला काव्य संकलन "अनुभूतियों के प्रस्फुटन" की चंद पंक्तियाँ
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