दोगला
दोगला ===================== बार बार बार तुम्हारा ख़ंजर, बहोत दर्द देता है दोस्त लोगो, दुष्मन का तो मै कुछ करु, मगर तुम दोस्त बणकर वार पिछेसे करते हो. ईसीलिये कुछ वक्त तक आईना भी , नही बताता की जखम कहा है, और कीस ने दीया है........., मै दोस्त पे शक क्यु करु...., पहले तो मै कीसी दुष्मनही की तलाश करता हु, ईसीलिये दोस्त तुमपर शक करते, करते..., मेरा बहोत वक्त कट जाता है, और तुम्हारा जखम भर जाता है. और फीर से तयारी का एक नौका, तुम्हे और मील जाता है, धोका फरेबबी का अच्छा खासा,टाईम, तुम्हे......पिठ पिछे खंजर घोपने का, एक और मोका मील जाता है. क्या तुम्हे कभी आपने कर्म का डर नही लगता, कीस खानदान से हो यार.... ये औच्छी हरकत करते हो. जरा सामने से आकर तो वार करो क्यु हर बार ये दोगलेपण की औच्छी हरकत करते हो, हरकत करते हो. =================== ==========================
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