हरिगीतिका छंद
राम का सुमिरन करो दशरथ ललन राघवन रघुपति, राम का सुमिरन करें। आनंद दायक है विधाता, ध्यान अपने मन धरें।। रक्षक यही सबका हमेशा,गान गुण इनका करें। लो प्रेम से प्रभु नाम हरदम, जो सदा संकट हरें।। सुमिरन करो सब राम का ही, तारता अवतार ले। करना भजन तल्लीन होकर,जाप कर हर बार ले।। पीड़ा हरे संकट उबारे, एक ही निष्काम हैं। आते धरा पर बन मनुज ये,राम ही तो श्याम हैं।। वाचाल करता मूक को ये,पंगु भी पर्वत चढ़े। जिसपर कृपा इनकी रही तो, मूढ़ भी रचना गढ़े।। नर मत करो अब देर क्षणभर, मंत्र जप श्री राम का। संसार में सब व्यर्थ मानो,मात्र ये हैं काम का।। नरेन्द्र सिंह, 02.04.2025
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