मिट्टी की महक
बादलों की गोद से, जब बूँदें छलकती हैं। धरा की छाती पर, नयी जीवन रेखा रचती हैं।टप-टप गिरती बूँदें, सपनों को जगाती हैं। सूखी मिट्टी में, नयी खुशियाँ भर जाती हैं। ओस की बूँदें जैसे, आँखों में चमक लाएँ। वैसे ही मिट्टी की, महक मन को लुभाएँ। पगडंडी पर चलते, मन गाने लगता है। मिट्टी की सौंधी खुशबू, जैसे गीत नया रचता है।हरियाली की बाहों में, धरती जब सजीव हो जाए। बादल, बारिश, और मिट्टी की, खुशबू सबको लुभाए। ओ बारिश, तू फिर से आ, मिट्टी का दिल धड़का जा। तेरी बूँदों की महक से, सारी दुनिया महका जा।
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