दोहा
छुपे हुए गद्दार बचे नहीं कोई यहाँ, छुपे हुए गद्दार। खोज-खोज कर मार दो, हे भारत सरकार।। दया नहीं इन पर करो , मिले शीघ्र ही दंड। कांप उठे अब शत्रु सब, करना बार प्रचंड।। बदला ले लो पाक से, रहना अब मत मूक।। गिन-गिन कर है मारना, नहीं तनिक हो चूक।। सर से जल ऊपर चढ़ा, नहीं करो बर्दास्त। रिपु को मारो घेर कर, उसको करो परास्त।। नरेंद्र सिंह,26.04.2025
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