✨बचपन के वो दिन ✨
✨कागज की कश्ती सपनों का समंदर हर चीज में लगता था अपना एक मंजर ना दौड़ थी ना हार का डर वो बचपन के दिन थे सबसे बेफिकर✨ by- Rohit Chandra
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