रैना
तुम्हें देखकर ये हौसला आया मैं अभी बुड्ढा नहीं हुआ तुमसे अभी जवान हूं इस बात में कमाल हूं। डेढ़ दशक बाद तुमसे मिला तुझ में तो कुछ नहीं बदला तुम तो बिल्कुल वैसे ही हो जैसे कल थे वैसे ही आज हो। दरिया दिल, फक्कर , यारों के यार ज़िन्दा है अभी वो रंगीन मिजाज वही मस्ती वही बातें वही ज़ज्बात जैसे हो कैंपस में अभी भी फुदकते। डीएवी या राजाराम हॉस्टल हो तुम्हारी पहचान आज भी यूनिक है सुना है वही रैना केजीएमयु आया है हॉस्पिटल में आनंद का प्रवाह आया है। कोटि कोटि धन्यवाद तुम्हें मेरे अपने को अपनाने के लिए श्याम पर मेरे हिस्से का प्यार लुटाने के लिए मेरे भाई को वहां पढ़ाने सिखाने के लिए। मैं भी जल्दी आता हूं तुम संग समय बिताता हूं फिर से पुराने दिन जिएंगे पुराने यादों में हंसेंगे रोयेंगे।
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