..
कब तक दर-दर भटकेंगे, कब तक यू सर पटकेंगे कितनी और बेटियां खोएंगे कब तक खून के आंसू रोएंगे.... क्यों भीख रक्षा की मांगे क्यों हम दर्दी पांए,... जिनको जना हमी ने ...उनके द्वारा मारे जाएं? आन पड़ेगी मानव जाति को विपदा भारी, जब हाथ खड़े कर देगी ...... तुमको जनने से नारी दुशासन की सभा लगी है , चारो तरफ दिशाओं में, शक्ति दुर्गा काली का बल है , नारी अस्ट भुजाओं में... ले आओ भीतर की काली को , अब खड्ग उठाने की बारी है, समझा दो दुनिया को , जिससे चलती ये दुनिया वो एक नारी है..!
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
