मेरी परिचय
मैं वह हूँ जो खेतों से पली–बढ़ी हैं। मैं वह हूँ जिसने पहाड़ों में अपनी घर बसाई हैं। मैं वह हूँ जिसकी बातों से मन नहीं भरता किसी का, मैं वह हूँ जिसके बिना रहता पूरा घर सुना हमारा। मैं वह हूँ जिसकी चमक चीजों से ना होती, मैं वह हूँ जिसकी चाहत धन–दौलत ना होती। मैं वह हूँ जो सरलता में खुशियां प्राप्त करती हैं, मैं वह हूँ जो चाँद–सितारों से मोहब्बत करती हैं। मैं वह हूँ जिसे अकेलेपन में शांत मिलता, मैं वह हूँ जिसे निस्तब्धता में आनंद मिलता। मैं वह हूँ जो दूसरों पे निर्भर ना रहती, मैं वह हूँ जिन्हें किसी साथ की चाह ना रहती। मैं बस वह हूँ जिसने अपनी पहचान बनाने की ठानी हैं, मैं बस वह हूँ जिसने अपनी दम पर खड़े होने की ठानी हैं। मैं वह महिला हूँ...
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