खौप
खौप ====================== चाहे पुरातन से रावण तु, चाहे, द्रोपदी का वस्त्र हरण कर्ता तु, और चाहे आजका चीडीमार , या रोड मजनु तु। सिर्फ आजतका सामने आया ईतीहास, तुने कोमल ऱ्हदय बणाया निशाना, सिर्फ कमजोर नारी को ही। तेरा वास्ता जब कभी मर्दसे पडा, वक्त ने हर बार तेरी और तेरी जात की, धज्जीयाही उडा दी। तु खुद को कुछभी समज, ना समज एक ईंन्सा भगवानने ने सिर्फ तेरी मौत लिखी है, चाहे जमी हो या आसमा। मर्द के दर्द का खौफ बडा ही, दर्दनाक होता है, ये जालीम ईंन्सान.... ये जालीम ईंन्सांन । ===============
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
