मार्च में मदहोश बगीचा
मार्च के महीने में देखा एक मदहोश बगीचा, लाल पीले फूलों की चारों तरफ बिखरी पड़ी पंखुड़ियां , जैसे शहजादे के स्वागत में बिछा दिया हो कोई गलीचा। फूलों में रंग, पेड़ो में हरियाली, झोंको में खुशबू, हवा में ताज़गी, एक कोने में मुरझाया हुआ गुलाब जैसे बयां कर रहा हो अपनी नाराज़गी। हरी घास में पानी की चमकती बूंदे, जैसे आसमान में लटक रहे हो मोती। पत्तो का सीना चीरती खिलखिलाती तेज धूप, खुशबू से लोगों के मन को पिरोती। फूलों ने अपनी दिल की पंखुड़ियों में खुशबू को आहिस्ता से कर रखा है सहेज, तेज हवा के झोंको से हो गया मानो जैसे परहेज़। बगिया के बीच एक पतली से पगडंडी, किनारे पर मुस्काता एक सफेद गुलाब, झुकी हुई पलके , मखमली तार सी उसकी डंडी। ठंडी हवा को आलिंगन करती एक दुबली पतली लंबी सी नाज़ुक कली, हरे आंचल को लपेटे लाज में सिमटी, उसके यौवन को निहारने कुछ तितलियां उस पर तेजी से झपटी।
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