सुकून: जिंदगी में, जिंदगी से!!
कुछ सवालों के जवाब ढूंढने हैं कुछ अपनी उनझनों से दो चार होने हैं कुछ कथा व्यथा की सीमाओं से पार होने हैं हैं सम्भालने कदम उलझनों के बवंडर से कुछ ही सही, पर! सुकून की राह में शरोबार होने हैं। यू तों हर दिन लगता है सुकून के जैसा फिर भी न जाने क्यूं सताये अनकहा डर जैसा सुबह का निकलना रात के ढ़लने जैसा कुछ इक पल चाहिए इनके जैसा कुछ प्रयासों की कथा है, तो कुछ पर है संघर्षों की व्यथा न जाने कब; पर है सुकून की तलाश कीचड़ में निकलने कमल के जैसा। बहुत कुछ है कहना बहुत कुछ है करना कुछ नया भी है सीखना मुश्किलों के बवंडर से है निकलना संघर्षों की व्यथा को है गूहना है नया कुछ करना, कुछ कहना, कुछ सुनना .. न जाने कब है उनसे मिलना सूकून की राह में है चलना है चलना ... चलना।।
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