फिर से उठो
💐जीवन में कुछ पल आता है, जो कभी भी रुला जाता है। जो रोना धोना छोड़ दिया, वही नर फिर सँवर जाता है।। कहीं तूफान जब आता है, पक्षी -नीड़ उजड़ जाता है। किन्तु खग मानता हार कहाँ फिर नव बसेरा बनाता है।।💐 नरेंद्र आने वाली मेरी सातवीं पुस्तक "अनुभूतियों का प्रस्फुटन" की कुछ चंद पँक्तियाँ।
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
