हुस्न का जलवा
हिरोईन ========================== हिरोईन बनने , अब हुस्न का ज्लवाही काफी है, वो दौर कहा आब, थोडी ऑक्टींंग भी होणी जरुरी थी. दिखावे की दुनीयामे , माॅं की ममता के गाने कहा....., अब तो चोली के पिछे का हाल होता है. पिच्छर मे काम मिलने के लिये तो अब, अभिनय नही, दाम मांगा जाता है, या.... छोटा छत्री, या मोठा खतरी की पहचान . पुराणा जमाना तो बिलकुल ही , बदल गया अब, नया दौर आया है, कोई तगडी हैसीयत हो तो फिर, ऊस के मुताबिकर सारा पिच्छार चलता है....... , डायरेक्ट तो एक विदुषक बनकर, रह जाता है, रह जाता है. *****************
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