आवारा
आवारा ======================= आवारा मण सैतान का घर, करणी ऊनकी............!, फीजुल की.................!, आखना ऊसका बिना सैर पैर का. बाते ऊनकी तीसमारखाॅ जैसी, सफेद कपडे और खिसे खाली, नजर ऊसकी बाहेर ख्याली, जाती ऊनकी कृत्ये जैसी. ना खुद है समाधानी, दुसरोके लिये जलन सारी, जालना और जालना! , जीवन भर की कमाई ईंनकी. करणी कुछ और.........., कथनी कुछ और, दीमाख ईनका न्यारो माईंड, आवारगी है पेशा ईनका....., !. खुद्द समझते है ये होशियार, लोकीन फिरत ईंनकी, कव्वो जैसी.........!. दोखा धडी है नियम ईनका. पैदायसी पेशा ईनका, आवारा और आवारगी, आवारा और आवारगी. =================
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